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علامہ محمد اقبال / Allama Muḥammad Iqbāl / अल्लामा मोहम्मद इकबाल

"सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा Saare Jahan Se achcha Hindustan humara"

Sunday, April 10, 2011

वो कल के ग़म-ओ-ऐश

वो कल के ग़म-ओ-ऐश पैर कुछ हक नहीं रखता
जो आज खुद अफरोज़-ओ-जिगर सोज़ नहीं है
वो कौम नहीं लेक-ए-हंगामा-ए-फ़र्दा
जिस कौम कि तक़दीर मैं इमरोज़ नहीं है
- अल्लामा इकबाल

Wo kal kay gham-o-aish per kuch Haq nahin rakhta
Jo aaj khud afroz-o-jigar soz nahin hai
Wo qaum nahin laiq-e-hangama-e-farda
Jis qaum ki taqdeer main imroz nahin hai

(Meanings: gham-o-aish = thick n' thin; khud afroz-o-jigar soz = A person with
motivation and determination; Laiq-e-hangama-e-farda = worthy to survive
anymore; imroz = Present)

Puneet Ghai

1 comment:

  1. बहुत अच्छी पोस्ट, शुभकामना, मैं सभी धर्मो को सम्मान देता हूँ, जिस तरह मुसलमान अपने धर्म के प्रति समर्पित है, उसी तरह हिन्दू भी समर्पित है. यदि समाज में प्रेम,आपसी सौहार्द और समरसता लानी है तो सभी के भावनाओ का सम्मान करना होगा.
    यहाँ भी आये. और अपने विचार अवश्य व्यक्त करें ताकि धार्मिक विवादों पर अंकुश लगाया जा सके., हो सके तो फालोवर बनकर हमारा हौसला भी बढ़ाएं.
    मुस्लिम ब्लोगर यह बताएं क्या यह पोस्ट हिन्दुओ के भावनाओ पर कुठाराघात नहीं करती.

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